रुद्राक्ष के प्रकार | Types of Rudraksha

Hello Friends!! Uttrakhandsservices में आपका बहुत- बहुत स्वागत है । मै हु Anshu Singh और आज हम बात करेगे रुद्राक्ष के प्रकार | Types of Rudraksha. इस विषय पर। तो आइये जानते है कि रुद्राक्ष कितने प्रकार के होते है? तथा इसके फायदे क्या-क्या है?

हमारे धार्मिक ग्रंथों में रुद्राक्ष के महत्व की खूब चर्चा की गई है. हर तरह के रुद्राक्ष को किसी न किसी रूप में बेहद लाभकारी बताया गया है. हर रुद्राक्ष के एक कोने से लेकर दूसरे कोने तक कुछ धारियां खिंची होती हैं. इन्हें मुख कहा जाता है. आगे चर्चा की गई है कि किस तरह का रुद्राक्ष धारण करने से क्या लाभ होता है...

1) एकमुखी रुद्राक्ष - यह साक्षात शिव का स्वरुप माना जाता है. सिंह राशी वालों के लिए यह अत्यंत शुभ होता है. जिनकी कुंडली में सूर्य से सम्बंधित समस्या हो ऐसे लोगों को एक मुखी रुद्राक्ष जरूर धारण करना चाहिए.

आपने महसूस किया होगा की आप बहार जाते है तो आपको कुछ जगहों पर फौरन नींद आ जाती है|लेकिन कुछ जगहों पर बेहद थके होने के बावजूद आप सो नहीं पाते। यह इस वजह से होता है क्यों की आपके आस पास का माहौल आपकी ऊर्जा के अनुकूल नहीं होता|

रुद्राक्ष एक सुरक्षा कवच के तरह काम करता है जो की आपको हर परेशानियों से बचाता है| आपके जीवन में आने वाली परेशानियों से आपको दूर रखता है| इसे धारण करने से बाहरी ऊर्जाएं आपको परेशान नहीं कर पातीं। इसीलिए रुद्राक्ष को ऐसे लोगों को अवश्य धारण करना चाइये| जो लगातार यात्रा करते है| जिन्हें हर रोज अलग-अलग जगहों पर रहना पड़ता है।

2) दोमुखी रुद्राक्ष- यह अर्धनारीश्वर स्वरुप माना जाता है. कर्क राशी के जातकों को यह अत्यंत उत्तम परिणाम देता है. अगर वैवाहिक जीवन में समस्या हो या चन्द्रमा कमजोर हो दो मुखी रुद्राक्ष अत्यंत लाभकारी होता है

3) तीनमुखी रुद्राक्ष- यह रुद्राक्ष अग्नि और तेज का स्वरुप होता है. मेष राशी और वृश्चिक राशी के लोगों के लिए यह उत्तम परिणाम देता है. मंगल दोष के निवारण के लिए इसी रुद्राक्ष का प्रयोग किया जाता है.

4) चारमुखी रुद्राक्ष- यह रुद्राक्ष ब्रह्मा का स्वरुप माना जाता है मिथुन और कन्या राशी के लिए सर्वोत्तम. त्वचा के रोगों और वाणी की समस्या में इसका विशेष लाभ होता है.

5) पांचमुखी रुद्राक्ष- इसको कालाग्नि भी कहा जाता है, इसको धारण करने से मंत्र शक्ति तथा अदभुत ज्ञान प्राप्त होता है. जिनकी राशी धनु या मीन हो या जिनको शिक्षा में लगातार बाधाएँ आ रही हों ,ऐसे लोगों को पांच मुखी रुद्राक्ष धारण करना चाहिए.

पंच्मुकी रुद्राक्ष नकारात्मक ऊर्जा से बचाता है| बहुत से लोग नकारात्मक शक्ति का इस्तेमाल करके दूसरों को नुकसान पहुंचाते हैं। यह अपने आप में एक अलग विज्ञान है। कथाओ में इसके बारे में बताया गया है. कि ऊर्जा को अपने फायदे और दूसरों के अहित के लिए प्रयोग में लाया जा सकता है।

अगर कोई इंसान इस विद्या में महारत हासिल कर ले| तो वह अपनी शक्ति के प्रयोग से दूसरों को किसी भी हद तक नुकसान पहुंचा सकता है|

6) छः मुखी- इसको भगवान कार्तिकेय का स्वरुप माना जाता है. इसको धारण करने से व्यक्ति को आर्थिक और व्यवसायिक लाभ होता है. अगर कुंडली में शुक्र कमजोर हो अथवा तुला या वृष राशी हो तो छः मुखी रुद्राक्ष धारण करना शुभ होता है.

7) सातमुखी रुद्राक्ष- यह सप्तमातृका तथा सप्तऋषियों का स्वरुप माना जाता है. मारक दशाओं में तथा अत्यंत गंभीर स्थितियों में इसको धारण करने से लाभ होता है. अगर मृत्युतुल्य कष्टों का योग हो अथवा मकर या कुम्भ राशी हो तो यह अत्यंत लाभ देता है.

8) अष्टमुखी अष्ट - यह अष्टदेवियों का स्वरुप है तथा इसको धारण करने से अष्टसिद्धियाँ प्राप्त होती हैं. इसको धारण करने से आकस्मिक धन की प्राप्ति सहज होती है तथा किसी भी प्रकार के तंत्र मंत्र का असर नहीं होता. जिनकी कुंडली में राहु से सम्बन्धी समस्याएँ हों ऐसे लोगों को इसे धारण करना शुभ होता है.

9) नौमुखी रुद्राक्ष - नौ मुखी रुद्राक्ष को भैरव कहा गया है. इसे बाईं भुजा में पहनना चाहिए. इसे धारण करने वाले को भोग और मोक्ष की प्राप्त होती है. नौ मुखी रुद्राक्ष को भैरव का स्वरूप माना जाता है. इसे बाईं भुजा में धारण करने से गर्भहत्या जेसे पाप से मुक्ति मिलती है. नवम मुखी रुद्राक्ष को यम का रूप भी कहते हैं. यह केतु के अशुभ प्रभावों को दूर करता है.

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10) दशमुखी रुद्राक्ष - दशमुखी रुद्राक्ष को जनार्दन या विष्णु का स्वरूप बताया गया है. इसे धारण करने से मनुष्य के सभी ग्रह शांत रहते हैं और उसे किसी तरह का भय नहीं सताता है. दस मुखी रुद्राक्ष को भगवान विष्णु का स्वरूप कहा जाता है. 10 मुखी रुद्राक्ष शांति एवं सौंदर्य प्रदान करने वाला होता है. इसे धारण करने से समस्त भय समाप्त हो जाते हैं.

11) ग्यारह मुखी- एकादश मुखी रुद्राक्ष स्वयं शिव का स्वरुप माना जाता है. संतान सम्बन्धी समस्याओं के निवारण के लिए तथा संतान प्राप्ति के लिए इसको धारण करना शुभ होता है. ग्यारह मुखी रुद्राक्ष को साक्षात् रुद्र कहा गया है. जो इसे श‍िखा में धारण करता है, उसे कई हजार यज्ञ कराने का फल मिलता है.
एकादश मुखी रुद्राक्ष साक्षात भगवान शिव का रूप माना जाता है. 11 मुखी रुद्राक्ष को भगवान हनुमान जी का प्रतीक माना गया है इसे धारण करने से ज्ञान एवं भक्ति की प्राप्ति होती है.

12) बारहमुखी रुद्राक्ष - बारह मुखी रुद्राक्ष कान में धारण करना शुभ बताया गया है. इसे धारण करने से धन-धान्य और सुख की प्राप्ति होती है. द्वादश मुख वाला रुद्राक्ष बारह आदित्यों का आशीर्वाद प्रदान करता है. इस बारह मुखी रुद्राक्ष को धारण करने से अश्वमेघ यज्ञ के समान यह फल प्रदान करता है.

13) तेरहमुखी रुद्राक्ष - तेरह मुखी रुद्राक्ष के बारे में कहा गया है कि अगर यह मिल जाए, तो सारी कामनाएं पूरी कराने वाला होता है. तेरह मुखी रुद्राक्ष को इंद्र देव का प्रतीक माना गया है इसे धारण करने पर व्यक्ति को समस्त सुखों की प्राप्ति होती है.

14) चौदहमुखी रुद्राक्ष - चौदह मुखी रुद्राक्ष धारण करने से मनुष्य श‍िव के समान पवित्र हो जाता है. इसे सिर पर धारण करना चाहिए. धारण करने के साथ-साथ जप आदि कार्यों में भी रुद्राक्ष का प्रयोग होता है. जप करने में 108 दानों की माला उपयोगी मानी गई है. चौदह मुखी रुद्राक्ष भगवान हनुमान का स्वरूप है. इसे सिर पर धारण करने से व्यक्ति परमपद को पाता है.

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