रुद्राक्ष धारण करने की विधि

Hello Friends!! Uttrakhandsservices में आपका बहुत- बहुत स्वागत है । मै हु Anshu Singh और आज हम बात करेगे रुद्राक्ष धारण करने की विधि । तो आइये जानते है कि रुद्राक्ष को किस प्रकार धारण करे ।  

आज के समय में बहुत से लोग एक दुसरे को देखकर ही रुद्राक्ष धारण करने का मन बना लेते है व बाजार से रुद्राक्ष लेकर सीधे गले में धारण कर लेते है | ऐसे लोगों के लिए रुद्राक्ष केवल और केवल वस्तु का कार्य करता है जिससे जातक को रुद्राक्ष के वैज्ञानिक लाभ तो मिलते है किन्तु अध्यात्मिक लाभ नहीं मिल पाते |

शास्त्रों में वर्णित विधि अनुसार रुद्राक्ष धारण करने वाले जातक पर सदैव भगवान शिव की विशेष कृपा बनी रहती है | किन्तु शास्त्रों में वर्णित रुद्राक्ष धारण करने के नियमों का हमेशा पालन करना चाहिए अन्यथा आप रुद्राक्ष के चमत्कारिक परिणामों से हमेशा-हमेशा के लिए वंचित होने लगते है |

रुद्राक्ष धारण करने की विधि

आइये जानते है रुद्राक्ष को धारण करने की विधि के बारे में : –

आम तौर पर मनकों को एक माला के रूप में पिरोया जाता है। एक से लेकर 14 मुखी तक रुद्राक्ष तक आप गले में धारण कर सकते है | ये सभी रुद्राक्ष अध्यात्मिक द्रष्टि से अलग-अलग प्रभाव रखते है | पारंपरिक रूप से यह माना जाता है कि मनकों की संख्या 108 "प्लस एक" होनी चाहिए। अतिरिक्त मनका बिंदु की तरह है। माला में हमेशा एक बिंदु होना चाहिए, वरना ऊर्जा चक्रीय हो जाएगी और जो लोग संवेदनशील हैं | उन्हें चक्कर आ सकते हैं। एक वयस्क को 84 "प्लस एक बिंदु" से कम मनकों की माला नहीं पहननी चाहिए।


रुद्राक्ष का चुनाव करने के पश्चात् कुछ दिन इसे सरसों के तेल में डालकर रख दे | रुद्राक्ष को पूर्ण विधि अनुसार धारण करें व इससे सम्बन्धित नियमों का पालन करें | अब किसी सोमवार के दिन आप रुद्राक्ष को अच्छे से साफ़ करके इसे पहले पंचामृत( दूध,दही,शहद,शक्कर,गंगाजल के मिश्रण) से स्नान कराये फिर गंगा जल से स्नान कराये | अब कुमकुम से तिलक करें | दूप दिखाए व पूजा के स्थान पर दीपक जलाकर ॐ नमः शिवाय मंत्र के यथा संभव जप करें | आपके जीवन से हर दुःख, कष्ट शीघ्र ही दूर होने लगेंगे |


इस प्रकार करने के पश्चात् अब आप भगवान शिव के मंदिर जाकर शिवलिंग पूजा करें व अंत में रुद्राक्ष को शिवलिंग से स्पर्श कराते हुए भगवान शिव का ध्यान करें और अब रुद्राक्ष को गले में धारण करें | विधि अनुसार रुद्राक्ष को धारण करने के पश्चात् इसकी पवित्रता को बनाये रखना बहुत जरुरी है अन्यथा यह कुछ समय के पश्चात् प्रभावहीन होने लगता है | जो व्यक्ति शराब,मॉस व दुसरे गलत कार्य करते हो उन्हें तो रुद्राक्ष को धारण करना ही नहीं चाहिए अन्यथा ऐसा व्यक्ति पाप का भागी बनता है |


रुद्राक्ष को सोमवार के दिन, श्रावण मास में किसी भी दिन या शिवरात्रि के दिन धारण करना शुभ माना गया है | रुद्राक्ष को कभी भी काले धागे में धारण न करें. लाल, पीला या सफेद धागे में ही धारण करें. रुद्राक्ष को चांदी, सोना या तांबे में भी धारण किया जा सकता है लेकिन धारण करते समय 'ॐ नम: शिवाय' का जाप करना न भूलें| रुद्राक्ष को कभी भी अपवित्र होकर धारण न करें| साथ ही कभी भी भूलकर किसी दूसरे व्यक्ति को अपना रुद्राक्ष धारण करने के लिए नहीं दें | पूर्ण विधि अनुसार रुद्राक्ष पहनने से इसके चमत्कारिक परिणाम आप पहले दिन से ही अनुभव करने लगेंगे |

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भगवान शिव की नित्य पूजा करें | जब आप उन्हें पिरोएं, तो सबसे अच्छा होगा कि उन्हें एक रेशमी धागे में या सूती धागे में पिरोया जाए। अगर आप इसे धागे में पहनते हैं, तब हर छह महीने पर धागे को बदलना अच्छा रहता है| वरना एक दिन धागा टूट सकता है| और आपके 108 मनके हर जगह बिखर जाएंगे। अगर आप चाहें तो तांबे या सोने के तार में पिरो सकते हैं । यह ठीक है लेकिन ज्यादतर समय होता यह है कि आप पिरोने के लिए इसे किसी सुनार के पास ले जाते हैं।


जब सुनार सोने के तार से या जिस किसी तार से गांठ बांधता है| आम तौर पर वे इन्हें बहुत करीब रखकर कसकर बांध देते हैं और मनका अंदर से टूट जाता है। मैंने देखा है| सुनार को यह बताने के लिए लोगों से कहने के बावजूद| जब वे इसे दिखाने के लिए मेरे पास वापस लाते हैं, तो लगभग 30-40 प्रतिशत मौकों पर वे टूटे हुए होते हैं। यह बहुत महत्वपूर्ण है कि आप यह सुनिश्चित करें कि माला में मनके ढीले हैं। इन्हें बहुत करीब रखकर नहीं बांधना चाहिए, क्योंकि अगर दबाव के कारण यह अंदर से टूट जाता है, तो यह किसी काम का नहीं है।


रुद्राक्ष धारण करने के पश्चात् समय-समय पर रुद्राक्ष को पंचामृत व गंगाजल द्वारा पवित्र करते रहे | रुद्राक्ष को गंदे हाथों से स्पर्श न करें | पूजा के समय रुद्राक्ष को दूप दिखाए | घर में सूतक आदि के समय आये तो इसके तुरंत बाद रुद्राक्ष को पवित्र करना न भूले | किसी दाह संस्कार या मृत व्यक्ति के दिनों में जाने के पश्चात् भी रुद्राक्ष को पवित्र करें | महिलाएँ रुद्राक्ष को पीरियड्स के दिनों में उतार कर रख दे व बाद में पवित्र करके ही पुनः धारण करें | दूसरों का अहित न करें व झूठ न बोले | अनैतिक संबंधों से दूर रहे |


अगर आप ठंडे पानी से नहाते हैं और किसी केमिकल साबुन का इस्तेमाल नहीं करते हैं| तो इसके ऊपर से बहकर निकले पानी का आपके शरीर पर से बहना विशेष रूप से अच्छा है। लेकिन अगर आप किसी केमिकल साबुन और गरम पानी का इस्तेमाल कर रहे हैं | तो यह भंगुर बन जाता है और कुछ समय बाद चटक जाएगा। तो ऐसे मौकों पर इसे पहनने से बचना बेहतर होगा।


माला को हर समय पहना जा सकता है। आप नहाते समय भी पहने रह सकते हैं। आप जिस रुद्राक्ष को धारण करते है उसे भूलकर भी किसी अन्य व्यक्ति को पहनने के लिए न दे चाहे वह आपके परिवार का ही कोई सदस्य क्यों न हो | किसी दुसरे का पहना हुआ रुद्राक्ष भी गले में धारण नहीं करना चाहिए | रुद्राक्ष खरीदने से पहले इसकी शुद्धता की अच्छी प्रकार से जांच कर ले | टूटा हुआ रुद्राक्ष व कीड़ा लगा हुआ रुद्राक्ष धारण करने योग्य नहीं होता |


कितनी संख्या में रूद्राक्ष धारण करें

भगवान शिव के प्रसाद यानी रुद्राक्ष को हमेशा विषम संख्या में धारण करें। कभी भी 27 दानों से कम की रुद्राक्ष माला न बनवाएं क्योंकि ऐसा करने पर शिवदोष लगता है| 108 दानों की माला को धारण करने और उसे जप करने से साधक को विशेष कृपा हासिल होती है| रुद्राक्ष पहनने से एकाग्रता तथा स्मरण शक्ति मजबूत होती है ।

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