Lockdown एक मजदूर की आवाज

Hello friends

हा,आज मैं उन लोगो की बात कर रही हु जिन्होंने हमारे शहर बनाने के लिए अपना खून पसीना एक कर दिया है आज मैं उन्ही मजदूर की बात करने वाली हु.

 

जैसा कि आप सभी लोग lockdown से भली भांति परिचित है Corona virus के प्रकोप से पूरी दुनिया मे lockdown चल रहा है इस समय हम सब अपनी family के साथ time spend कर रहे है पर क्या आपने कभी ये सोचा है जिसने हमे छत दी आज वो किस हालत में है

 

 जैसा कि आज कल हम सब daily news में देख ही रहे है कि मजदूर अपने घर जाने के लिए सैकड़ो हजारों किलो मीटर पैदल भूखे प्यासे चलने के लिए मजबूर है जिनके पास आज खाने को दो वक्त की रोटी भी नसीब में नही है ये वही लोग है जिन्होने हमारे शहर को बनाया और आज उसी शहर में उनके लिए कोई छत नही है

 

 हम लोगो ने कुछ ऐसी घटनाएं देखी और सुनी जो आज कल मजदूरों के साथ घटित हो रही है जैसे महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में हुई ट्रैन दुर्घटना, और उत्तर प्रदेश के औरैया नामक स्थान पर हुई सड़क दुघर्टना जिसे सुन कर प्रत्येक नागरिक का हृदय कॉप उठा

 

 इन सब घटनाओं से दुखी हो कर एक मजदूर वर्ग अपनी बात को कुछ इस प्रकार व्यक्त कर रहा है

 

एक मजदूर की आवाज...

 

जनाब मजदूर ही तो है

रोयेंगे जरा चिलायेंगे थोड़ा, हाथ पैर भी चलायेगे

फिर रोटी के चक्कर मे,चुप चाप काम पर लग जाएंगे

मजदूर ही तो है साहब, हम शांत हो जाएंगे

किसने कहा था , हमे पैदल चलने को ?

खाना दे तो रहे थे, हमारा पेट भरने को ?

ना हम घर से निकलते और न ही ट्रेन के निचे कुचलते

मजदूर ही तो है साहब, ऐसे ही मारे जाएंगे

हमारा तो वैसे भी कोई भविष्य नही था

अपने बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए घर से दूर आये थे

देश के विकास में हम भी अपना भागीदारी निभाना चाहते थे

मजदूर ही तो है साहब, शांत हो जाएंगे

न हम किसी के लिए आम है और न ही खास

हम तो वो है जो दुसरो के लिए दुनिया बसाते है

और खुद झुगिओ में अपना सिर छुपाते है

हम अपने लिए नही लड़ते, ना ही कोई आवाज उठाते

हम वो मजदूर है साहब

जो कुछ समय बाद

रोटी की तलाश में फिर पैदल निकल जाएंगे

और ऐसे ही पैदल चलते चलते कही गुम हो जाएंगे

मजदूर ही तो है साहब फिर शांत हो जाएंग

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